Monday, August 11, 2008

भाजपा में विद्रोह के लिए संगठन भी दोषी

राजेन्द्र जोशी
देहरादून : सरकार के मंत्रियों व विधायकों के दिल्ली कूच कर आलाकमान के सामने मुख्यमंत्री को हटाने का दुखड़ा रोने के मामले में भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी सवालों के घेरे में आ गया है। विद्रोही मंत्रीगण व विधायकों ने सारा मामला इतने गोपनीय तरीके से अंजाम दिया कि भाजपा संगठन व सरकार तक इस तूफान को दबाने में पूरी तरह असफल रहा। वर्तमान संकट से निपटने में प्रदेश आलाकमान अपने को असहाय महसूस कर रहा है। वहीं भाजपा के ही कुछ लोग इसे प्रदेश अध्यक्ष की असफलता भी करार दे रहे हैं।
गौरतलब हो कि बीते रोज सरकार के पांच मंत्रियों सहित 27 विधायकों की दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ पूर्व प्रदेश प्रभारी रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में पिछले 16 महीने के दर्द के साथ मुख्यमंत्री के सचिव व एक दायित्वधारी की शिकायत के मामले में पार्टी का प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह अंजान रहा। पूर्व मुख्यमंंत्री भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में जिस तरह असन्तुष्टों ने चुपचाप पूरी रणनीति का अन्जाम दिया, वह सरकार के पिछले 16 महीने के कार्यकाल की पोल खोलने के लिए काफी है। हालांकि मुख्यमंत्री के कुछ नजदीकी अधिकारियों को शनिवार को ही इसकी भनक लग गयी थी, किन्तु असन्तुष्टों ने कहीं से भी राज खुलने नहीं दिया।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने भी स्वीकार किया कि शनिवार को दोपहर उनकी पूर्व मुख्यमंत्री से फोन पर वार्ता भी हुई थी, किन्तु पूर्व मुख्यमंत्री ने नजदीकी केे बावजूद दिल्ली कूच की भनक तक लगने नहीं दी। इस पदाधिकारी ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि विधायकों का मुख्यमंत्री के तौर तरीकों पर इस तरह राष्ट्रीय परिदृश्य में सवाल उठाना, पार्टी के लिए बड़ा संकट है।
यह भी ज्ञात हुआ है कि सरकार के गठन के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष सहित चारों महामंत्री लगातार मुख्यमंत्री के सम्पर्क में रहकर सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हैं। हाल के दिनों में ही पंचायत चुनावों की सूची को लेकर मुख्यमंत्री से लगातार दो दिन तक विचारविमर्श किया गया। इसके बावजूद विधायकों के असन्तुष्ट होने के मामले की मुख्यमंत्री को जानकारी न देना खुद संगठन के ऊपर सवालिया निशान लगा देता है।
यह तो सर्वविदित ही था कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंंत्री पद पर खण्डूड़ी की ताजपोशी को पचा नहीं पाये थे और उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बावजूद जनता के बीच में अपनी सक्रियता लगातार बरकार रखी थी। कोश्यारी खेमे के विधायक भी उनके बल पर एकजुट रहे। कोश्यारी की इस मुहिम को एक और खण्डूड़ी विरोधी निशंक का साथ मिलने से बल मिल गया। देहरादून के राजनीतिक हलकों में तो दिन भर यह भी चर्चा रही कि खण्डूड़ी के साथ अब भाजपा के मात्र दो काबिना मंत्री बिशन सिंह चुफाल और मातबर सिंह कण्डारी ही रह गये हैं। कुछ विधायकों के दिल्ली से वापस आने के बावजूद उन्होंने इस सम्बन्ध में अपना मुंह बन्द रखना ही उचित समझा।
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने भी स्वीकार किया कि उन्हें विधायकों के इस कदम की जानकारी नहीं थी। विधायकों के ऊपर अनुशासनहीनता के मामले में कार्यवाही किये जाने के सवाल पर प्रदेश अध्यक्ष भी असहाय नजर आये।

No comments: